विदेश मंत्रालय, भारत सरकार
Ministry of External Affairs, Government of India

 9वाँ विश्व हिंदी सम्मेलन
जोहान्सबर्ग (दक्षिण अफ्रीका)
22-24 सितम्बर, 2012 

Ninth World Hindi Conference
Johannesburg [South Africa]
22-24 September, 2012

विश्व हिंदी सम्मेलनों मे पारित मंतव्य


 

प्रथम विश्व हिंदी सम्मेलन

नागपुर, भारत

10-12 जनवरी, 1975

 

 

पारित मंतव्य

1.      संयुक्त राष्ट्र संघ में हिंदी को आधिकारिक भाषा के रूप में स्थान दिलाया जाए।

 

2.      विश्व हिंदी विद्यापीठ की स्थापना वर्धा में हो।

 

3.      विश्व हिंदी सम्मेलनों को स्थायित्व प्रदान करने के लिए अत्यंत विचारपूर्वक एक योजना बनाई जाए।

 

 


 

द्वितीय विश्व हिंदी सम्मेलन

पोर्ट लुई, मॉरीशस

28-30 अगस्त, 1976

 

पारित मंतव्य

(1)  मारीशस में एक विश्व हिन्दी केन्द्र की स्थापना की जाए जो सारे विश्व की हिन्दी गतिविधियों का समन्वय कर सके

 

(2)  एक अन्तर्राष्ट्रीय पत्रिका का प्रकाशन हो जो भाषा के माध्यम से ऐसे समुचित वातावरण का निर्माण कर सके जिसमें मानव विश्व का नागरिक बना रहे ।

 

 

(3)  सम्मेलन में पारित प्रथम विश्व हिन्दी सम्मेलन में पारित इस प्रस्ताव का फिर से समर्थन किया गया कि हिन्दी को संयुक्त राष्ट्र संघ में एक आधिकारिक भाषा के रूप में स्थान मिले और सिफारिश की कि इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए एक समयबद्ध कार्यक्रम बनाया जाए ।

 

 


 

तृतीय विश्व हिंदी सम्मेलन

नई दिल्ली, भारत

28-30 अक्टूबर, 1983

 

पारित मंतव्य

(1)   सम्मेलन के लक्ष्यों और उद्देश्यों की पूर्ति के लिए निर्मित अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर एक स्थायी समिति का गठन किया जाए

 

(2)   सम्मेलन की संगठन समिति को इस कार्य के लिए अधिकार दिया जाए कि वह भारत के प्रधानमंत्री से परामर्श करके उनकी सहमति से स्थायी समिति का गठन करे

 

 

(3)   इस समिति में देश-विदेश के 25 सदस्य हों

 

(4)   इसके प्रारूप एवं संविधान, कार्य-विधि और सचिवालय की रूप रेखा निर्धारित करने के लिए यह समिति अपनी उप-समिति गठित करे जो तीन महीने के भीतर अपनी संस्तुति संगठन समिति को दे ओर उस पर कार्रवाई की जाए

 

 

 


 

 

चतुर्थ विश्व हिंदी सम्मेलन

पोर्ट लुई, मॉरीशस

02-04 दिसम्बर, 1993

 

पारित मंतव्य

(1) चतुर्थ विश्व हिन्दी सम्मेलन की आयोजक समिति को यह अधिकार दिया जाता है कि वह भारत और मॉरिशस के प्रधानमंत्रियों से परामर्श करके तीन माह के अन्दर एक स्थायी समिति एवं सचिवालय गठित करे जिसका लक्ष्य भविष्य में विश्व हिन्दी सम्मेलनों का आयोजन करना तथा अंतर्राष्ट्रीय भाषा के रूप में हिन्दी का विकास और उत्थान करना होगा ।

 

(2) यह सम्मेलन पिछले तीनो विश्व सम्मेलनों में पारित संकल्पों की संपुष्टि करते हुए 'विश्व हिन्दी विद्यापीठ' की शीघ्रातिशीघ्र स्थापना की मांग करता है । साथ ही मॉरिशस में विश्व हिन्दी केन्द्र की स्थापना की मांग को दोहराता है ।

 

 

(3) सम्मेलन इस तथ्य पर संतोष व्यक्त करता है कि विश्व के अनेक विश्व विद्यालयों में हिन्दी का अध्ययन और उध्यापन उत्तरोतर बढ़ता जा रहा है । यह सम्मेलन विभिन्न राष्ट्र सरकारों और विश्व विद्यालयों से अनुरोध करता है कि वे हिन्दी पीठों की स्थापना उत्साहपूर्वक करे ।

 

(4) इस सम्मेलन का यह मंतव्य है कि विश्व के सभी देशों विशेषकर भारत तथा भारत मूलतः जनसंख्या वाले देशों के बीच सर्वविद संचार व्यवस्था को सुदृढ़ बनाया जाए । हिन्दी को प्राथमिकता देते हुए इन देशों के साथ आकाशवाणी, दूरदर्शन और समाचार समितियों के प्रगाढ़ संबंध स्थापित किए जाएं । इस संदर्भ में भारत और मॉरिशस के बीच हिन्दी की समाचार समिति 'भाषा' की सेवा शुरु होने पर सम्मेलन प्रसन्नता व्यक्त करता है और इस ऐतिहासिक कदम के लिए यह सम्मेलन मॉरिशस और भारत के प्रधानमंत्रियों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करता है । सम्मेलन भारत से अनुरोध करता है कि हिन्दी के दैनिक समाचार पत्र, पत्रिकाएं और पुस्तकें प्रकाशित करने में सक्रिय सहायता करे ।

 

(5) चतुर्थ विश्व हिन्दी सम्मेलन की मान्यता है कि राष्ट्रीय एवं अंतरार्ष्ट्रीय स्तर पर हिन्दी का प्रयोग और प्रभाव बढ़ा है लेकिन इसके बावजूद हिन्दी को उसका उचित स्थान प्राप्त नहीं हो सका है । अतः यह सम्मेलन महसूस करता है कि हिन्दी को उसका उचित स्थान दिलाने के लिए शासन और जन समुदाय विशेष प्रयत्न करे ।

 

(6) यह सम्मेलन विश्व के समस्त हिन्दी प्रेमियों से अनुरोध करता है कि वे अपने निजी एवं सार्वजनिक कार्यों में हिन्दी का अधिकाधिक प्रयोग करें और यह संकल्प लें कि वे कम से कम अपने हस्ताक्षरों, निमन्त्रण पत्रों, निजी पत्रों और नामपटो में हिन्दी का प्रयोग करेंगे ।

 

(7) इस सम्मेलन में आए विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों से अपेक्षा की जाती है कि वे अपने-अपने देशों के शासन को सम्मेलन की इस मांग से अवगत कराएंगे कि हिन्दी को संयुक्त राष्ट्र संघ की आधिकारिक भाषा बनाने के लिए वे सघन प्रयास करें ।

 

 

 

 

 

पांचवां विश्व हिंदी सम्मेलन

पोर्ट ऑफ स्पेन, ट्रिनिडाड एण्ड टोबेगो

04-08 अप्रैल, 1996

 

पारित मंतव्य

(1) यह सम्मेलन भारतवंशी समाज एवं हिन्दी के बीच एक जीवंत समीकरण बनाने का प्रबल समर्थन करता है और यह आशा करता है कि विश्वव्यापि भारतवंशी समाज हिन्दी को अपनी संपर्कभाषा के रूप में स्थापित करेगा एवं एक विश्व हिन्दी मंच बनाने में सहायता करेगा ।

 

(2) सम्मेलन चिरकाल से अभिव्यक्त अपने मंतव्य की पुनः पुष्टि करता है कि विश्व हिन्दी सम्मेलन को स्थाई सचिवालय की सुविधा उपलब्ध होनी चाहिए । सम्मेलन के विगत मंतव्य के अनुसार यह सचिवालय मॉरिशस में स्थापित होना निर्णित है । इसके त्वरित कार्यान्वयन के लिए एक अंतर सरकारी समिति का गठन किया जाए। इस समिति का गठन मॉरिश एवं भारत सरकार द्वारा किया जाना चाहिए। इस समिति में सरकारी प्रतिनिधियों के अलावा पर्याप्त संख्या में हिन्दी के प्रति निष्ठावान साहित्कारों को सम्मिलित किया जाए । यह समिति अन्य बातों के साथ-साथ सचिवालयी व्यवस्था के अनेकानेक पहलुओं पर विचार करते हुए एक सर्वांगिण कार्यक्रम योजना भारत तथा मॉरिशस की सरकारों को प्रस्तुत करेगी।

 

 

(3) यह सम्मेलन सभी देशों, विशेषकर उन देशों जहां भारतीय मूल तथा अप्रवासी भारतीय बसते हैं, कि सरकारों से आग्रह करता है कि वे अपने देश में विभिन्न स्तरों पर हिन्दी के अध्ययन-अध्यापन की व्यवस्था करे ।

(4) यह सम्मेलन विश्व स्तर पर हिन्दी भाषा को प्राप्त जनाधार और उसके प्रति जनभावना को देखते हुए सभी देशों, जहां भारतीय मूल तथा अप्रवासी भारतीय बसते हैं, में हिन्दी के प्रचार-प्रसार में संलग्न स्वयं सेवी संस्थाओं/ हिन्दी विद्वानों से आग्रह करता है कि वे अपनी-अपनी सरकारों से आग्रह करे कि वे हिन्दी को संयुक्त राष्ट्र संघ की भाषा बनाने के लिए राजनयिक योगदान तथा समर्थन दें ।

(5) यह सम्मेलन भारत सरकार द्वारा महात्मागांधी अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी विश्व विद्यालय स्थापित करने के निर्णय का स्वागत करता है और आशा करता है कि इस विश्व विद्यालय की स्थापना से हिन्दी को विश्वव्यापी बल मिलेगा ।

 

 

 

 

  

 

 

छठा विश्व हिंदी सम्मेलन

लंदन, यू. के.

14-18 सितम्बर, 1999

 

पारित मंतव्य

(1) विश्व भर में हिन्दी के अध्ययन-अध्यापन, शोध, प्रचार-प्रसार और हिन्दी सृजन में समन्वय के लिए महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय केंद्र सक्रिय भूमिका निभाए।

 

(2) विदेशों में हिंदी शिक्षण, पाठ्यक्रमों के निर्धारण, पाठ्यपुस्तकों के निर्माण, अध्यापकों के प्रशिक्षण आदि की व्यवस्था भी विश्वविद्यालय करे और सुदूर शिक्षण के लिए आवश्यक कदम उठाए।

 

(3) मॉरीशस सरकार अन्य हिंदी-प्रमी सरकारों से परामर्श कर शीघ्र विश्व हिंदी सचिवालय स्थापित करे।

 

(4) हिंदी को संयुक्त राष्ट्र में मान्यता दी जाए।

 

(5) हिंदी की सूचना तकनीक के विकास, मानकीकरण, विज्ञान एवं तकनीकी लेखन, प्रसारण एवं संचार की अद्यतन तकनीक के विकास के लिए भारत सरकार एक कंद्रीय एजेंसी स्थापित करे।

 

(6) नई पीढ़ी में हिन्दी को लोकप्रिय बनाने के लिए आवश्यक पहल की जाए।

 

(7) भारत सरकार विदेश स्थित अपने दूतावासों को निर्देश दे कि वे भारतवंशियों की सहायता से विद्यालयों में एक भाषा के रूप में हिंदी शिक्षण की व्यवस्था करवाएं।

 

 

 

 

7वां विश्व हिंदी सम्मेलन

पारामारिबो, सूरीनाम

06-09 जून, 2003

 

पारित मंतव्य

(1) संयुक्त राष्ट्र संघ में हिंदी को अधिकारिक भाषा  बनाया जाए।

 

(2)  विदेशी विश्वविद्यालयों में हिंदी पीठों की स्थापना की जाए

 

(3) हिंदी भाषा और साहित्य का प्रचार-प्रसार, हिंदी शिक्षण संस्थाओं के बीच संबंध तथा भारतीय मूल के लोगों में हिंदी के प्रयोग के प्रचार के उपाय किए जाएं ।

 

(4) हिंदी के प्रचार हेतु वेबसाइट की स्थापना और सूचना प्रौद्योगिकी का  प्रयोग हो।

 

(5) हिंदी विद्वानों की एक विश्व निर्देशिका का प्रकाशन किया जाए।

 

(6) विश्व हिंदी दिवस का आयोजन हो ।

 

(7) कैरेबियाई हिंदी परिषद की स्थापना की जाए।

 

(8) दक्षिण भारत के दस विश्वविद्यालयों में हिंदी विभाग की स्थापना की जाए।

 

(9) भारत में एम ए हिंदी के पाठय़क्रम में विदेशों में रचित हिंदी लेखन को समुचित स्थान दिलाया जाए ।

 

(10) सूरीनाम में हिंदी शिक्षण का संवर्धन किया जाए।

 

 

8वां विश्व हिंदी सम्मेलन

न्यूयॉर्क, अमरीका

13-15 जुलाई 2007

 

पारित मंतव्य

(1)      विदेशों में हिंदी शिक्षण और देवनागरी लिपि को लोकप्रिय बनाने के उद्देश्य से दूसरी भाषा के रूप में हिंदी शिक्षण के लिए एक मानक पाठय़क्रम बनाया जाए तथा हिंदी के शिक्षकों को मान्यता प्रदान करने की व्यवस्था की जाए

 

(2)      विश्व हिंदी सचिवालय के कामकाज को सक्रिय एवं उद्देश्यपरक बनाने के लिए सचिवालय को भारत तथा मारीशस सरकार सभी प्रकार की प्रशासनिक एवं आर्थिक सहायता प्रदान करें और दिल्ली सहित विश्व के चार-पांच अन्य देशों में इस सचिवालय के क्षेत्रीय कार्यालय खोलने पर विचार किया जाए   सम्मेलन सचिवालय से यह आह्वान करता है कि हिंदी भाषा को लोकप्रिय बनाने के लिए विश्व मंच पर हिंदी वेबसाईट बनायी जाए

 

 

(3)      हिंदी में ज्ञान-विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं तकनीकी विषयों पर सरल एवं उपयोगी हिंदी पुस्तकों के सृजन को प्रोत्साहित किया जाए।  हिंदी में सूचना प्रौद्योगिकी को लोकप्रिय बनाने के प्रभावी उपाय किए जाएं।  एक सर्वमान्य सर्वत्र उपलब्ध यूनीकोड को विकसित सर्वसुलभ बनाया जाए

 

(4)      विदेशों में जिन विश्वविद्यालयों तथा स्कूलों में हिंदी का अध्ययन-अध्यापन होता है उनका एक डाटा-बेस बनाया जाए और हिंदी अध्यापकों की एक सूची भी तैयार की जाए।

 

 

(5)      यह सम्मेलन विश्व के सभी हिंदी प्रेमियों और विशेष रूप से प्रवासी भारतीयों तथा विदेशों में कार्यरत भारतीय राष्ट्रिकों से भी अनुरोध करता है कि वे विदेशों में हिंदी भाषा, साहित्य के प्रचार-प्रसार में योगदान करें।

 

(6)      वर्धा स्थित महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय में विदेशी हिंदी विद्वानों के अनुसंधान के लिए शोधवृत्ति की व्यवस्था की जाए।

 

(7)      केन्द्रीय हिन्दी संस्थान भी विदेशों में हिन्दी के प्रचार-प्रसार पाठय़क्रमों के निर्माण में अपना सक्रिय योगदान दे। 

 

(8)      विदेशी विश्वविद्यालयों में हिन्दी पीठ की स्थापना पर विचार-विमर्श किया जाए।

 

(9)      हिन्दी को साहित्य के साथ-साथ आधुनिक ज्ञान-विज्ञान और वाणिज्य की भाषा बनायी जाये।

 

(10)    भारत द्वारा राष्ट्रीय एवं अन्तरराष्ट्रीय स्तरों पर आयोजित की जाने वाली संगोष्ठियों सम्मेलनों में हिन्दी को प्रोत्साहित किया जाए।